विद्वेषण

 कुलटा स्त्री से पर-पुरुष उच्चाटन का मन्त्र


सामग्री जलपात्र, सियार सिंगी, दो हकीक पत्थर, तेल का दीपक।

माला हकीक माला।

समय दिन या रात का कोई भी समय।

आसन नीले रंग का सूती आसन।

दिशा पश्चिम दिशा।

जप-संख्या पांच हजार।

अवधि जो भी सम्भव हो।


मन्त्रः ॐ अंजनी पुत्र पवनसुत हनुमान वीर वैताल साथ लावे मेरी सौत।

(अमुक) से पति को छुड़ावे। उच्चाटन करे करावे मुझे वेग पति मिले। मेरा कारज

सिद्ध न करे तो राजा राम की दुहाई।


प्रयोग—पहले पांच हजार मन्त्र जप करके इस मन्त्र को सिद्ध करना चाहिए।

फिर सियार सिंगी के सामने दो हकीक पत्थर रख दें। एक पर उस स्त्री का नाम

लिखें, दूसरे हकीक पत्थर पर नाम न लिखें, अपितु यह लिखें कि अमुक स्त्री से

जिस पुरुष के भी सम्बन्ध हों, वह विच्छेद हो जाए। फिर दोनों हकीक पत्थर सियार

सिंगी के सामने रखकर हकीक माला से पांच हजार जप करें।

___ मन्त्र जप पूरा होने पर सियार सिंगी के साथ उस हकीक पत्थर को, जिस

पर स्त्री का नाम अंकित है, लाल कपड़े में बांधकर संदूक में रख दें और वह दूसरा

हकीक पत्थर जमीन में गाड़ दें।


इस प्रकार करने से उस स्त्री के अन्य जितने भी पुरुषों से संबंध होंगे, वे

संबंध खत्म हो जायेंगे और उनमें परस्पर लड़ाई-झगड़ा होगा।


यह प्रयोग पति कर सकता है या प्रेमी कर सकता है। जिसे यह विश्वास

हो कि मेरी प्रेमिका के संबंध अन्य पुरुषों से हैं।


मित्र विद्वेषण


मन्त्रः ॐ नमो आदेश गुरु सत्य नाम को। बारहा सरसों। तेरहा राई। बाट

की मीठी। मसान की छाई। पटक मारुकर जलवार। अमुक फुटेन देख अमुक द्वार।

मेरी भक्ति। गुरु की शक्ति। फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।।


विधि थोड़ी पीली सरसों, थोड़ी राई, थोड़ी मेथी, आम तथा ढाक वृक्ष की

सूखी लकड़ी ले आयें और फिर श्मशान में जाकर किसी चिता की राख ले आयें।

अब आप हवन करने के लिए लकड़ियों से वेदी बनायें और शेष सामग्री को एकसार

करके इस मंत्र को पढ़ते हुए 108 आहुतियां देखें तो दोनों मित्रों में परस्पर विद्वेष

हो जायेगा।




2 comments:

  1. मुझे मिर्गी रोग से मुक्ति के लिए कोई मन्त्र बताएं कृपया

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    1. मंत्र
      ॐ हलाहल सरगत मंडिया पुरिया
      श्री राम जी फूंके मिर्गी बाई सूखे
      सुख होय ॐ ठः ठः स्वाहा

      दिन - रविवार/ शुभ मुहूर्त
      जप - १०८
      माला - रुद्राक्ष
      विधी - २१ बार जप कर के भोज पत्र पर अष्टगंध से अनार की कलम से मंत्र लिखकर काले धागे मे बांधकर ताबिज मे भोजपत्र डालकर धूप/अगरबत्ती दिखाकर गले मे धारण किजीये

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