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मानसिक शक्ति, Psychological Power

यह सभी जानते हैं कि संसार में एक पत्ता भी भगवान की इच्छा के

बिना नहीं हिलता परन्तु मनुष्य को चेष्टा करनी चाहिए। कर्म मनुष्य का धर्म है और फल देने वाला ईश्वर है। अतः ईश्वर को सर्वव्यापी जानकर

इसकी क्रियाएं करें। कोई कार्य ऐसा न करें, जिससे दूसरों का अनिष्ट हो।

पहले दूसरों का भला करें, फिर अपना भला करें, तभी ईश्वर आपका भला

करेगा।

कोई भी प्रयोग सिद्धि करने से पूर्व किसी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर

लें। किसी भी प्रकार की हानि के लिए  ब्लॉग ( Blog) उत्तरदायी नहीं होंगा।





भूत-प्रेत का अस्तित्व, विवाद और व्यापक चर्चा का विषय

है। यह न केवल मनोवैज्ञानिक रूप से होते हैं वरन् अनेकों घटनायें

इनके अस्तित्व का प्रमाण हैं। इनका एक आकार (स्वरूप) भी होता

है जिनसे सम्पर्क का विधान पराविज्ञान में प्रचुरता से पाया जाता है।

इनके उत्पातों को शान्त कर, इनको वशीभूत करके भरपूर लाभ भी

उठाया जा सकता है और ये मानसिक साधना द्वारा होता है जिसकी

साधना और सिद्धियों के उपाय इस Blog में दिए गए हैं।


स्मृती शक्ति मंत्र

स्मृती शक्ति मंत्र:--



ॐ ही ही ही सरस्वत्यैः ।।

 प्रयोग से पहले उसकी सिद्धि आवश्यक है। सिद्धि के लिए 10,000
व का जप करना होता है। एक किलो शुद्ध घृत को चार किलो बकरी के दूध
में मिलायें और इसमें केवडे के फूल, सहजने की जड़ और सेंधा नमक डाल दें।
इसे हल्की आग पर रख दें। जब दवाएं और दूथ जल जायें तो उतार लें। इस
में पनः दूध और दवाएं डालें और हल्की आग पर रखें। इस प्रक्रिया को 3
अपनाएं। इसके सेवन से स्मृति-शक्ति की साधारण वृद्धि होती है। यहां तक
कहा गया है कि इससे गूंगे को भी कंठ मिलता है।