यह सभी जानते हैं कि संसार में एक पत्ता भी भगवान की इच्छा के
बिना नहीं हिलता परन्तु मनुष्य को चेष्टा करनी चाहिए। कर्म मनुष्य का धर्म है और फल देने वाला ईश्वर है। अतः ईश्वर को सर्वव्यापी जानकर
इसकी क्रियाएं करें। कोई कार्य ऐसा न करें, जिससे दूसरों का अनिष्ट हो।
पहले दूसरों का भला करें, फिर अपना भला करें, तभी ईश्वर आपका भला
करेगा।
कोई भी प्रयोग सिद्धि करने से पूर्व किसी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य कर
लें। किसी भी प्रकार की हानि के लिए ब्लॉग ( Blog) उत्तरदायी नहीं होंगा।
भूत-प्रेत का अस्तित्व, विवाद और व्यापक चर्चा का विषय
है। यह न केवल मनोवैज्ञानिक रूप से होते हैं वरन् अनेकों घटनायें
इनके अस्तित्व का प्रमाण हैं। इनका एक आकार (स्वरूप) भी होता
है जिनसे सम्पर्क का विधान पराविज्ञान में प्रचुरता से पाया जाता है।
इनके उत्पातों को शान्त कर, इनको वशीभूत करके भरपूर लाभ भी
उठाया जा सकता है और ये मानसिक साधना द्वारा होता है जिसकी
साधना और सिद्धियों के उपाय इस Blog में दिए गए हैं।

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